पंचकूला में नागरिक सुविधाओं को लेकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला, शिकायत हुई दर्ज !
पंचकुला में बुनियादी ढांचे की बदहाली पर सवाल, नागरिकों की सुरक्षा बनी चिंता
पंचकुला में नगर निगम, एचएसवीपी, पीएमडीए, एचएसआईआईडीसी, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, पुलिस और सार्वजनिक परिवहन विभाग द्वारा शहर की सड़कों, फुटपाथों, डिवाइडरों, जल निकासी और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। जनसंख्या बढ़ने के साथ शहर की कई व्यवस्थाएं अप्रचलित हो चुकी हैं, जबकि रखरखाव और निगरानी की कमी से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
शहर की कई प्रमुख सड़कों का करीब एक साल पहले नवीनीकरण किया गया था, लेकिन वे अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। इससे दोपहिया और छोटे वाणिज्यिक वाहनों के चालकों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। हैरानी की बात यह है कि मरम्मत की वारंटी अवधि में भी दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई। लेन विभाजन के लिए लगाए गए परावर्तक स्टड और सड़क चिह्न कई जगह गायब हैं, जबकि अनेक महत्वपूर्ण संकेतक और ज़ेबरा क्रॉसिंग या तो हट चुके हैं या अधूरे हैं।
अधिकांश सड़कों पर अनिवार्य यातायात संकेतक जैसे गति सीमा बोर्ड, स्पष्ट जंक्शन संकेत, स्लिप रोड, साइकिल ट्रैक और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों का अभाव है। स्पीड टेबल, रंबल स्ट्रिप और कैट-आई लगाने की मांग बार-बार उठाई गई, लेकिन संबंधित एजेंसियों ने इसे नजरअंदाज किया, जिससे लेन मर्जिंग और सुरक्षित आवागमन मुश्किल हो गया है।हायशी इलाकों में पेड़ों की समय पर छंटाई न होने से दृश्यता प्रभावित हो रही है। मुख्य सड़कों पर लगाए गए दिशा-निर्देश बोर्ड पेड़ों की घनी शाखाओं के कारण दिखाई नहीं देते, जिससे लाखों रुपये की लागत से लगाए गए संकेत व्यर्थ साबित हो रहे हैं। कई स्थानों पर सड़क किनारे फैले बड़े पेड़ों से भारी वाहनों की आवाजाही भी जोखिमभरी हो गई है।
फुटपाथों की स्थिति भी चिंताजनक है। कई जगह फुटपाथ मौजूद ही नहीं हैं, और जहां हैं वहां पत्थर टूटे या गायब हैं। पैदल यात्रियों के लिए चौराहों पर आवश्यक संकेतक भी नहीं लगाए गए। वहीं, जल निकासी पाइपों में रुकावट के चलते बरसात के दिनों में सेक्टर 8, 9, 10, 15, 19 और 20 में जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है, जिससे घरों, बाजारों और यातायात को नुकसान होता है।
रीहायशी इलाकों में पेड़ों की समय पर छंटाई न होने से दृश्यता प्रभावित हो रही है। मुख्य सड़कों पर लगाए गए दिशा-निर्देश बोर्ड पेड़ों की घनी शाखाओं के कारण दिखाई नहीं देते, जिससे लाखों रुपये की लागत से लगाए गए संकेत व्यर्थ साबित हो रहे हैं। कई स्थानों पर सड़क किनारे फैले बड़े पेड़ों से भारी वाहनों की आवाजाही भी जोखिमभरी हो गई है।
फुटपाथों की स्थिति भी चिंताजनक है। कई जगह फुटपाथ मौजूद ही नहीं हैं, और जहां हैं वहां पत्थर टूटे या गायब हैं। पैदल यात्रियों के लिए चौराहों पर आवश्यक संकेतक भी नहीं लगाए गए। वहीं, जल निकासी पाइपों में रुकावट के चलते बरसात के दिनों में सेक्टर 8, 9, 10, 15, 19 और 20 में जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है, जिससे घरों, बाजारों और यातायात को नुकसान होता है।इसके अलावा, शहर के कई चौराहों और सड़कों पर केंद्रीय मार्ग (सीबीडी) के क्षतिग्रस्त होने से सड़कें लंबे समय तक बंद रहती हैं। हाल ही में सेक्टर 15 और इंडस्ट्रियल एरिया फेज-II के पास ऐसी ही स्थिति बनी, जहां सड़क बंद होने से यातायात वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ना पड़ा और क्षेत्र दुर्घटना-प्रवण बन गया।
इन समस्याओं को लेकर नागरिक कल्याण संघ के अध्यक्ष एस. के. नायर और सदस्यों ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग, चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज कराई है। आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को निर्धारित की है। अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग कब तक ऐसे ढुलमुल रवैये के साथ काम करते रहेंगे और शहरवासियों को सुरक्षित व सुचारू बुनियादी सुविधाएं कब तक मिलेंगे ।
इसके अलावा, शहर के कई चौराहों और सड़कों पर केंद्रीय मार्ग (सीबीडी) के क्षतिग्रस्त होने से सड़कें लंबे समय तक बंद रहती हैं। हाल ही में सेक्टर 15 और इंडस्ट्रियल एरिया फेज-II के पास ऐसी ही स्थिति बनी, जहां सड़क बंद होने से यातायात वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ना पड़ा और क्षेत्र दुर्घटना-प्रवण बन गया।
इन समस्याओं को लेकर नागरिक कल्याण संघ के अध्यक्ष एस. के. नायर और सदस्यों ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग, चंडीगढ़ में शिकायत दर्ज कराई है। आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को निर्धारित की है। अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग कब तक ऐसे ढुलमुल रवैये के साथ काम करते रहेंगे और शहरवासियों को सुरक्षित व सुचारू बुनियादी सुविधाएं कब तक मिलेंगे ।




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