पंजाब केसरी पर छापेमारी को लेकर क्या बोली स्वाति मालीवाल ?
पंजाब केसरी समूह पर बढ़ी कानूनी कार्रवाई, जालंधर में दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज
पंजाब में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार और प्रमुख मीडिया समूह पंजाब केसरी के बीच टकराव और गहराता नजर आ रहा है। समूह से जुड़े संस्थानों पर हालिया छापों के बाद अब जालंधर में पंजाब केसरी समूह के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अविनाश चोपड़ा, अमित चोपड़ा और एक प्रेस कर्मचारी के खिलाफ दो अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों ने मीडिया स्वतंत्रता और सरकारी कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहला मामला जालंधर देहाती पुलिस ने थाना मकसूदां में दर्ज किया है। यह एफआईआर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जॉइंट हेड बॉर्डर सिंह के बयानों के आधार पर दर्ज की गई, जिसमें अविनाश चोपड़ा और प्रेस कर्मचारी ऋषभ सोही को आरोपी बनाया गया है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
दूसरा मामला जालंधर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा थाना न्यू बारादरी में दर्ज किया गया। यह केस पंजाब केसरी समूह से जुड़े होटल पार्क प्लाजा में हाल ही में एक्साइज विभाग की रेड से संबंधित है। एक्साइज विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर के बयान के आधार पर दर्ज इस एफआईआर में अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा को नामजद किया गया है। यह मामला एक्साइज एक्ट की धारा 61/1/14 के तहत दर्ज हुआ है।
सूत्रों का दावा है कि दोनों एफआईआर 15 जनवरी की रात करीब 12 बजे दर्ज की गईं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इन मामलों को ऑनलाइन सिस्टम में सार्वजनिक रूप से तुरंत प्रदर्शित नहीं किया गया, जिससे सामान्य जानकारी सामने आने में देरी हुई। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि जिन स्थानों से जुड़े मामलों में चोपड़ा बंधुओं को आरोपी बनाया गया है, उस समय वे वहां मौजूद नहीं थे।
इन घटनाओं के बाद अखबार प्रबंधन और विभिन्न पत्रकार संगठनों ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि एफआईआर और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल मीडिया संस्थानों पर दबाव बनाने और आलोचनात्मक आवाजों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयां स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती हैं और सरकार को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पंजाब केसरी पर कार्रवाई को लेकर स्वाति मालिवाल का हमला, आप सरकार पर मीडिया दबाव के आरोप
पंजाब केसरी समूह पर हुई हालिया कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी की पूर्व सहयोगी और राज्यसभा सांसद स्वाति मालिवाल ने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए एक विस्तृत पोस्ट में मालिवाल ने दावा किया कि पंजाब में मीडिया संस्थानों के साथ सरकार का व्यवहार उनकी रिपोर्टिंग की दिशा पर निर्भर करता है, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
स्वाति मालिवाल के अनुसार, पंजाब केसरी द्वारा पंजाब के कथित ‘सुपर सीएम’ और शीश महल-2 से जुड़ी खबर प्रकाशित किए जाने के बाद सरकार का पूरा तंत्र उस अखबार के खिलाफ सक्रिय हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है, जिसके जरिए यह तय किया जाता है कि कौन-सा मीडिया संस्थान सरकार के पक्ष में खबरें चलाएगा और कौन नहीं।
मालिवाल ने कहा कि जो मीडिया सरकार की खुलकर प्रशंसा करता है, उसे करोड़ों रुपये के विज्ञापन दिए जाते हैं, जबकि मामूली आलोचना करने वाले संस्थानों के विज्ञापन रोक दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, उनके अनुसार कई मामलों में पुलिस कार्रवाई और पत्रकारों की मान्यता रद्द करने जैसे कदम भी उठाए जाते हैं, जिससे मीडिया पर दबाव बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली के कुछ पत्रकारों को पंजाब में पदस्थापित कर सरकार के अनुकूल माहौल तैयार किया गया। अलग-अलग विभागों के माध्यम से विज्ञापन पर भारी खर्च किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जनहित में सूचना देना कम और सरकारी छवि को चमकाना अधिक बताया गया है।
स्वाति मालिवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस दिन सरकार के विज्ञापन खर्च और प्रचार तंत्र की पूरी तस्वीर सामने आएगी, वह चौंकाने वाली होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के भीतर से उठी यह आवाज न केवल केजरीवाल सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करती है, बल्कि मीडिया की स्वतंत्रता, सरकारी विज्ञापन नीति और सत्ता के इस्तेमाल को लेकर व्यापक बहस को भी हवा देती।





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