खरी-अखरी : मोदी और शाह की भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए निकृष्टतम और घिनौने आरोपों को भारत रत्न की तरह स्वीकार कर रही है !
मोदी और शाह की भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए निकृष्टतम और घिनौने आरोपों को भारत रत्न की तरह स्वीकार कर रही है !
if the people would allow your country to recognize israel. Could be investing to discuss if not may be consider putting 1 billion into a fund to benefit the victims of terrorist acts, asking the other gcc members to match it. we are against terrorism we have always been and today to illustrate it we are setting up a victim fund to be administered by the US vk and united nations? we call on the other members countries to match our funding not with pleadges but with cash. our first nifi will be to pay for the electric for gaza..? we will support and Intt committee to look into terrorism finance across all countries and produce a conclusive report by the end of year. something positive. I understand the delay response from uncle. good luck. on sun July 9 2017 at 11.4 AM jabor y. I agree with you totally on the below. it is good and encouraging to receive your views and opinion on the matter. On Thu Jul 6 2017 at 3.32 PM Jeffrey Ë. I think qatar should stop kicking and arguing. let the head come down a list it will never be the same again. many tears in the making. the current qatar team very weak. FM is not experienced and it shows. Qatar needs to come out against terrorism and not just say. sorry you can prove it. we are and have always been against terrorism. the smell to terrorism financing will be around for years. I thing early next year they will attack the world cup venue. The Indian Prime Minister Modi look dvice and danced and song in Israel for the benefit of the US president. They had met a few week ago IT WORKED. tell me exactly what you would like from starbucks and I can try to make it happen. the moment anything Qatari. is more difficult. 2 biscuits for breakfast.
31 अगस्त 2020 को रात 8.15 पर चीफ आफ इंडियन आर्मी नार्दर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी चीफ आफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को फोन कर बताते हैं कि चार चीनी टैंक पैदल सेना के समर्थन से पूर्वी लद्दाख के रेजिन लाॅ, जो कि खाड़ी और पहाड़ी का इलाका है, की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। जनरल नरवणे की समझ में आ जाता है कि चीनी टैंक कैलाश पर्वतमाला पर जो भारतीय चौकियां हैं उसके पास पहुंचना चाहते हैं । यह वह रणनीतिक जगह है जिसे भारतीय सेना ने कुछ ही घंटों पहले चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी से खतरनाक टकराव के बाद कब्जा किया है। इस ऊंचाई वाली जमीन पर जो वास्तविक सीमा है उसका हर एक मीटर राजनीतिक प्रभुत्व के बराबर है क्योंकि उस पर जिसका कब्जा होगा वही आगे बढ़ पायेगा। भारतीय सैनिकों ने चेतावनी के तौर पर रोशनी वाली गोली भी चलाई लेकिन उसका कोई असर चीनी सैनिकों पर नहीं हुआ और वे आगे बढ़ते रहे। जनरल नरवणे ने तत्काल भारतीय राजनीतिक और सैन्य प्रतिष्ठानों के नेताओं जिसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल, चीफ आफ आर्मी डिफेंस विपिन रावत और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हैं, को फोन के जरिए जानकारी देते हुए हर किसी से एक ही गुजारिश की गई कि मुझे क्या आदेश है? यह एक पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल होता है। नरवणे को पहले से ही स्पष्ट आदेश थे कि ऊपर से अनुमति मिलने तक गोलाबारी ना करें। हालात नाजुक थे और समय बीतता जा रहा था। रात 9.10 पर जोशी ने नरवणे को फोन कर बताया कि चीनी टैंक आगे बढ़ते हुए दर्रे से 1 किलोमीटर से भी कम दूरी पर पहुंच चुके हैं। रात 9.25 पर नरवणे ने राजनाथ सिंह को फिर फोन करते हुए स्पष्ट निर्देश देने की गुजारिश की लेकिन कोई भी स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया। इसी बीच जनरल नरवणे को जानकारी मिली कि पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन का एक संदेश आया है या कहें प्रस्ताव आया है कि दोनों पक्षों को आगे की गतिविधि रोक देनी चाहिए। स्थानीय कमांडर अपने अपने तीन प्रतिनिधियों के साथ सुबह 9.30 बजे दर्रे पर मिलेंगे। जनरल नरवणे को यह प्रस्ताव आगे का रास्ता निकालता हुआ तर्कसंगत लगा। रात 10 बजे इस प्रस्ताव की सूचना राजनाथ सिंह और अजीत डोभाल को देने के लिए फोन किया लेकिन 10 मिनट बाद ही लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने फोन कर नरवणे को जानकारी दी कि चीनी टैंक रुके नहीं हैं। वह अब शिखर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर हैं। इसका मतलब था कि चीनी सेना को रोकने के लिए एक ही तरीका है तोपखाने से हमला करना। जिसके लिए भारतीय सेना तैयार थी केवल उसे आदेश का इंतजार था। नरवणे के सामने दुविधा की स्थिति थी एक तरफ सेना संभावित गोलाबारी करना चाहती थी तो दूसरी तरफ सरकारी समिति कोई भी स्पष्ट आदेश नहीं दे रहा था। सेना मुख्यालय के आपरेशन रूम में विकल्पों पर विचार-विमर्श चलने लगा था, पूरा उत्तरी मोर्चा हाई अलर्ट पर आ चुका था। लेकिन निर्णायक मोड़ डांवाडोल था। नरवणे ने एक बार फिर राजनाथ सिंह को फोन किया जिस पर राजनाथ सिंह ने कालबैक करने का आश्वासन दिया। लेकिन राजनाथ सिंह का कोई फोनकाल नहीं आया तो नरवणे ने एक बार फिर से राजनाथ सिंह को फोन किया तो राजनाथ सिंह ने फिर से कालबैक करने का भरोसा दिया। समय बीतता जा रहा था, चीनी टैंक आगे बढ़ते चले आ रहे थे। रात 10.30 बजे राजनाथ सिंह ने नरवणे को कालबैक कर बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात की और उनका (मोदी) कहना है कि जो उचित समझें वह करें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी किसी तरह का कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया। यानी देश की सुरक्षा को सैन्य निर्णय के अधीन कर दिया गया। अब सेना की मर्जी जो चाहे सो करे। जनरल नरवणे के सामने इधर कुंआ उधर खाई या कहें सांप छछूंदर वाली स्थिति खड़ी हो गई थी। नरवणे के सामने एक दीवार पर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख का नक्शा था तो दूसरी दीवार पर पूर्वी कमान का नक्शा था। दिमाग में सैकड़ों विचार कौंध रहे थे। देश कोविड 19 की चपेट में था। देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं टूट चुकी थी। इन परिस्थितियों में अगर लड़ाई लड़ी जाती है तो क्या अतिरिक्त साजो सामान की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो पायेगी? वैश्विक मंच पर हमारे समर्थक कौन होंगे? जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना पल्ला झाड़ लिया था तो जो कुछ भी करना था सेना को करना था।
अमेरिका में सुबह हो रही थी भारत में रात हो चली थी। अपने टाइम लाइन से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। हमने रूस यूक्रेन युद्ध सहित कई मुद्दों पर चर्चा की और मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने की सहमति जताई। भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा। इसके अलावा वेंजुला से तेल खरीदने की संभावना पर भी बात हुई। इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी जहां हर हफ्ते हजारों लोगों की जानें जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की दोस्ती, सम्मान और उनके अनुरोध पर हमने अमेरिका और भारत के बीच तुरन्त एक ट्रेड डील पर सहमति बनाई है। अमेरिका भारत पर लगाया जाने वाला रेसिप्रोकल टेरिफ 25 फीसदी से कम करके 18 फीसदी करेगा। वहीं भारत भी अमेरिका के खिलाफ अपने टेरिफ और गैर टेरिफ बाधाओं को हटाकर शून्य करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका को लेकर बड़ी प्रतिबध्दता जताई है। इसके तहत भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा उर्जा यानी एनर्जी जिसमें तेल और गैस भी शामिल है, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, कोल यानी कोयला और अन्य उत्पादों को खरीदेगा। मुझे पूरा भरोसा है कि अमेरिका और भारत के रिश्ते आगे और मजबूत होंगे।
पहला पैरा दुनिया के सबसे बदनाम और यौन अपराधी, मानव तस्कर जेफरी एप्स्टिन के ई-मेल का है जिसे अमेरिकी सरकार के जस्टिस डिपार्टमेंट ने सार्वजनिक किया है और उसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खुले तौर पर जिक्र किया गया है। जिसमें उल्लेख है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजराइल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लाभ के लिए नाच गाना किया था। जेफरी एप्स्टिन ने ट्रंप के मीडिया कार्यकारी रणनीतिकार या कहें राजनीतिक रणनीतिकार स्टीव बेनन के हवाले से बताया कि उसकी और पीएम मोदी की एक अहम बैठक हुई है जिसमें मोदी ने कहा कि वाशिंग्टन में उनसे कोई बात नहीं करता है। भारत का मुख्य दुश्मन चीन है। मोदी स्टीव बेनन के विजन से पूरी तरह से सहमत हैं। स्टीव बेनन को मोदी से मिलना चाहिए और एप्स्टिन भेंट करवा सकता है। सवाल यह है कि अगर यह सही है कि वाशिंग्टन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोई परवाह नहीं करता है तो फिर मोदी अमेरिका के साथ अपनी दोस्ती के बारे में झूठ बोल रहे थे आखिर क्यों? जब चीन भारत का नम्बर एक का दुश्मन है तो फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चीन के द्वारा किए गए दुश्कर्मों पर क्लीन चिट क्यों दी जाती रही है? अमेरिकी राजनीतिक रणनीतिकार स्टीव बेनन के किस विजन से मोदी सहमत हैं?
दूसरा पैरा चीफ आफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी यादों को सहेजते हुए लिखी किताब FOUR STARS OF DESTINY के भीतर की कहानी का मोटा मोटा अंश भाग है। फिलहाल यह किताब मार्केट में आने के लिए पब्लिशर्स और मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के बीच उलझी हुई है। मोदी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह इस किताब को बाजार में आने नहीं देना चाहती। क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि अगर नरवणे की याददाश्तों भरी किताब आम आदमी की पहुंच में आ गई तो गोदी मीडिया और वेब सीरीज के जरिए गढ़ी गई एक साहसिक, निर्णायक और सक्रिय नेता की एक झटके में धराशाई हो जायेगी। वैसे भी देखा गया है कि चीन और अमेरिका के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घिग्घी बंध जाती है। जिस तरह के निर्देश पीएमओ ने दिए जिसे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के जरिए जनरल नरवणे को कन्वे किया गया इतने अस्पष्ट और संदिग्ध निर्देश भारतीय इतिहास में युद्ध काल के दौरान आज तक किसी की भी सरकार रही हो नहीं दिये गये। भारतीय संविधान की व्यवस्थाओं के मुताबिक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राजनैतिक नेतृत्व द्वारा ही युध्दकालीन परिस्थितियों में निर्णय लिये जाते हैं। 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान अटलबिहारी बाजपेई के नेतृत्व में सीसीएस की बठकों पर चर्चा के बाद स्पष्ट निर्णय लिए गये। यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर अंतिम निर्णय लेने वाली संस्था है। इसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करते हैं। यानी सीसीएस की बैठक कैबिनेट कमेटी आन सिक्योरिटी है। 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले युध्द के दौरान श्रीमती इंदिरा गांधी ने भी निर्णायक निर्णय लिए थे। दरअसल भारत के भीतर सेना प्रमुख की भूमिका यह नहीं है कि वह भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों का आंकलन करे। अमेरिका के संभावित राजनीतिक समर्थन या मूल्यबोध करने की कोशिश करे। पाकिस्तान और चीन के संयुक्त प्रयासों के जोखिम का आंकलन करे। इन सबके बीच कोविड 19 के संकट को भी ध्यान में रखे। इन सारी चीजों का आंकलन सरकार करती है। ऐसे मामलों में सेना को दिए जाने वाले राजनीतिक निर्देश स्पष्ट और असंदिग्ध यानी बड़ी साफ़गोई के साथ होने चाहिए और सरकार इस हकीकत को भलीभांति जान चुकी हो कि देश युध्द में जा रहा है।
तीसरा पैरा भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती की ऐसी दास्तान है जिसने भारत को ना जाने कितनी बार अपमानित किया है। मोदी और ट्रंप की टेलीफोनिक बातचीत की जानकारी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जरिए नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक्स हेंडल के जरिए देशवासियों के सामने आती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ट्यूट करने के तुरंत बाद अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुकरोलिंस ने कहा कि अब अमेरिका के किसानों के प्रोडक्ट भारत के बाजार में जाना शुरू हो जायेंगे। इससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में पैसा आयेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के बीच कहा था “भारत अपने किसानों के, पशुपालकों के और मछुआरे भाई बहिनों के हितों के साथ कभी समझौता नहीं करेगा। मैं जानता हूं व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। मेरे देश के किसानों के लिए, मेरे देश के मछुआरों के लिए, मेरे देश के पशुपालकों के लिए आज भारत तैयार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा कर दी कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा जिसका सीधा मतलब है मोदी ने ट्रंप के कहने पर भारत की संप्रभुता और स्वतंत्रता को ताक पर रख दिया है। भारत वेनेजुएला से तेल खरीदेगा यानी भारत का सेल्फ रिस्पेक्ट भी गायब हो गया है। जेफरी एप्स्टिन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम जुड़ना नरेन्द्र मोदी के लिए हो ना हो भारत और भारतियों के लिए शर्मनाक है। भले ही विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का झुकना भारत के लिए सेल्फ गोल जैसा है। डाॅलर के मुकाबले रूपया कहीं टिक नहीं पा रहा है। भारत के पास दुनिया में तीसरे नंबर पर कोयला है बावजूद इसके कोयला निकालना मंहगा पड़ता है। इसीलिए भारत के भीतर चलने वाले पावर प्रोजेक्ट इंडोनेशिया, मलेशिया, आस्ट्रेलिया जैसे देशों से कोयला खरीदते हैं क्योंकि वह सस्ता पड़ता है। कल को यही हाल भारतीय खेती का हो जायेगा।
सवाल तो यही है कि आखिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे सरेंडर क्यों किया ? इस सरेंडर के मूल में कहीं जेफरी एप्स्टिन की फाइल और गौतम अडानी का केस तो नहीं है ? क्या गौतम अडानी का पूरा साम्राज्य बीजेपी के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर या कहें नरेन्द्र मोदी के पाॅलिटिकल फाईनेंशियल स्ट्रक्चर से जुड़ा हुआ है और उस पूरे स्ट्रक्चर के गिरने का डर है ? क्या इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी सरेंडर हैं ? अब वो अटल आडवाणी की भाजपा तो है नहीं कि एक आरोप लगने पर आडवाणी ने इस्तीफा दे दिया था और दोष मुक्त होने के बाद ही संसद की सीढ़ियों पर पैर रखे थे। अब मोदी और शाह की भाजपा है जहां निकृष्टतम और घिनौने आरोपों को भारत रत्न की तरह स्वीकार किया जाता है। इनका तो मूल मंत्र ही सत्ता है और इनके लिए सत्ता ही सर्वोपरि है।
अश्वनी बडगैया अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार





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