17-10-2025
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हर वर्ष अक्टूबर–नवंबर के महीनों में पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठने वाला धुआँ दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत की साँसें रोक देता है। पराली जलाना किसानों की विवशता और नीतिनिर्माताओं की विफलता दोनों का परिणाम है। जब तक किसान के हित, कृषि की आवश्यकताएँ और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर देखा नहीं […]
उल्लास एवं समृद्धि का प्रतीक तथा भारतीय संस्कृति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और सर्वोपरि पर्व दीपावली का कारवां वैदिक युग की ज्ञान ज्योति से चलकर, ऐतिहासिक अंधकारों को चीरता तथा मुगलकाल की संकरी गलियों से गुजरता हुआ आजादी के खुले आंगन और घरों में प्रवेश कर चुका है। चाहे गांव-देहात हो या शहर, महानगर, गली-मोहल्ला हो […]
हमारे देश में महिला आरक्षण के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। आरक्षण के बाद चुनाव जीतकर आयी महिलाओं की संख्या बताकर महिला सशक्तिकरण को जमकर उछाला जाता है लेकिन असलियत में इस आरक्षण की जमकर धज्जियां बिखेरी जाती हैं। इस बार यह कारनामा हुआ है विदिशा नगर पालिका में। विदिशा नगरपालिका में इस […]
भारतीय न्यायपालिका की पहचान तो यही रही है कि न्याय का ककहरा लिखते वक्त जाति, धर्म, लिंग, सम्प्रदाय कुछ भी मायने नहीं रखता है लेकिन मौजूदा वक्त में उछाले जा रहे राजनीतिक जूते ने इस नकाब को भी नोचकर फेंक दिया है और चंद दिन पहले ही भावी सीजेआई ने उस पर अपनी मोहर भी […]
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“हम प्रेस को बुलाते हैं या भोजन प्रेमियों को?” : एक आयोजक सोशल मीडिया पर जब पत्रकार की नजर खबर से हटाकर गिफ्ट और दावत पर होगी , तो पत्रकारिता जनता की आवाज़ नहीं, भोजनालय की मेज बन जाएगी। आयोजकों को डिसाइड करना होगा कि वह क्वालिटी के लोग चाहते हैं या फिर क्वांटिटी में […]
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जब पूरे भारत में दीप जलते हैं, तो रामायण का एक अमर दृश्य आज के समय से संवाद करता है। हनुमान जी अपने बल पर संदेह करते हुए सागर के किनारे खड़े हैं, जब तक कि जाम्बवंत उन्हें यह याद नहीं दिलाते कि वह ताकत तो पहले से ही उनके भीतर है। उसके बाद जो […]
सदियों से भारतीय समाज जातीय भेदभाव की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है। यह नफरत केवल सामाजिक संरचना को नहीं, बल्कि इंसान के विवेक और संवेदना को भी कुंद कर चुकी है। हर निर्णय, हर दृष्टिकोण, हर न्याय आज जाति के तराज़ू पर तोला जाता है। जब तक समाज जातीय पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर न्याय-अन्याय के […]
