AI शिक्षा का एलान, लेकिन स्कूलों में शिक्षक नदारद
हरियाणा में 2230 में से 1859 कंप्यूटर शिक्षक पद खाली, सरकारी दावों पर गंभीर सवाल
हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पढ़ाने का बड़ा ऐलान कर देशभर में ध्यान खींचा है, लेकिन जमीनी हकीकत इस महत्वाकांक्षी योजना पर भारी पड़ती नजर आ रही है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर साइंस के 2230 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र 371 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 1859 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इस विरोधाभास को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
इनेलो के पंचकूला शहरी जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में एक सेमिनार में घोषणा की थी कि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्रों को AI, रोबोटिक्स, कोडिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और एग्रोटेक जैसे आधुनिक विषयों से जोड़ा जाएगा। उद्देश्य यह बताया गया कि छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। लेकिन सवाल यह है कि जब स्कूलों में कंप्यूटर साइंस के शिक्षक ही पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं हैं, तो इन अत्याधुनिक विषयों की पढ़ाई आखिर कौन करवाएगा।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि सरकार की नीति और वास्तविक तैयारी के बीच गहरी खाई साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक भर्ती में हो रही लगातार देरी इस संकट की सबसे बड़ी वजह है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले करीब सात वर्षों से कंप्यूटर साइंस विषय का भर्ती परिणाम घोषित नहीं किया गया है। इसके चलते लगभग 6100 प्रशिक्षित अभ्यर्थी असमंजस में फंसे हुए हैं।
इन अभ्यर्थियों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि परिणाम लंबित होने के कारण अधिकांश उम्मीदवार निजी स्कूलों में बेहद कम वेतन पर पढ़ाने को मजबूर हैं। जहां एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित युवा 10 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करने को विवश हैं और आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
इनेलो नेता ने साफ कहा कि यदि सरकार वास्तव में सरकारी स्कूलों में AI शिक्षा को सफल बनाना चाहती है, तो सबसे पहले लंबित भर्ती परिणाम जारी कर कंप्यूटर साइंस शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी। उनके अनुसार बिना प्रशिक्षित और पर्याप्त शिक्षकों के AI, कोडिंग और रोबोटिक्स जैसी योजनाएं सिर्फ कागजी घोषणाओं तक सीमित रह जाएंगी।
अब यह देखना अहम होगा कि सरकार अपनी इस हाई-प्रोफाइल शिक्षा योजना को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षक भर्ती की दिशा में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाती है, या फिर यह योजना भी आंकड़ों और भाषणों तक सिमट कर रह जाएगी।





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