15 महीने बाद अडानी ने US कोर्ट का नोटिस स्वीकारा, SEC केस आगे बढ़ा
भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे सिविल धोखाधड़ी मामले में एक अहम प्रक्रियात्मक बाधा दूर हो गई है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) अब अपने केस को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने की स्थिति में आ गया है।
अमेरिका की एक फेडरल अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, अडानी पक्ष के अमेरिकी वकीलों ने SEC के कानूनी दस्तावेज स्वीकार करने पर सहमति जता दी है। इससे अदालत को यह तय नहीं करना पड़ेगा कि भारत में रह रहे आरोपियों को समन किस माध्यम से भेजा जाए। यदि अदालत इस सहमति को मंजूरी देती है, तो गौतम और सागर अडानी को SEC की शिकायत पर जवाब देने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
SEC ने नवंबर 2024 में अडानी समूह से जुड़े अधिकारियों पर अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया था। एजेंसी का दावा है कि कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर अनुचित भुगतान और गलत जानकारियों से जुड़े कदम उठाए गए।
750 मिलियन डॉलर के जुर्माने के दावे और भारतीय राजनीति में हलचल
अडानी प्रकरण को लेकर अमेरिका में संभावित भारी आर्थिक दंड की चर्चाएं भी तेज हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और टिप्पणीकारों का दावा है कि सोलर एनर्जी से जुड़े एक कथित घूसखोरी मामले में अमेरिकी अदालत ने लगभग 750 मिलियन डॉलर के जुर्माने का संकेत दिया है। हालांकि, आधिकारिक न्यायिक आदेश और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
इसी बीच भारत में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और मीडिया हलकों में भी बहस तेज हो गई है। आलोचकों का आरोप है कि घरेलू मीडिया का एक बड़ा हिस्सा इस मामले पर सीमित या सतर्क कवरेज कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियां लगातार कानूनी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आर्थिक दंड लगाया भी जाता है, तो उससे कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं होगी और अमेरिकी जांच एजेंसियां अपने मामलों को आगे बढ़ा सकती हैं। अडानी समूह की ओर से इन सभी आरोपों को पहले ही सिरे से खारिज किया जा चुका है।
ब्लूमबर्ग की नजर में अडानी मामला: हिंडनबर्ग के बाद भी बरकरार कानूनी दबाव
अंतरराष्ट्रीय बिजनेस मीडिया संस्था ब्लूमबर्ग के अनुसार, अडानी समूह पर बीते एक वर्ष से अमेरिका में कानूनी अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। रिश्वतखोरी और प्रतिभूति धोखाधड़ी से जुड़े मामलों ने समूह की वैश्विक गतिविधियों को प्रभावित किया है, खासकर अमेरिका में।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआत में ऐसा माना जा रहा था कि कानूनी नोटिस की प्रक्रिया में देरी से अडानी पक्ष को राहत मिल सकती है, लेकिन अब SEC ने डिजिटल माध्यमों के जरिए केस को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इसके चलते गौतम अडानी को अपनी कानूनी टीम मजबूत करनी पड़ी है और अमेरिका के अनुभवी वकीलों की सेवाएं ली गई हैं।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद भले ही भारत में जांच एजेंसियों से समूह को राहत मिली हो, लेकिन अमेरिकी मामलों का दायरा कहीं अधिक व्यापक और सख्त माना जा रहा है। भारी जुर्माने और व्यक्तिगत जवाबदेही का जोखिम इन मामलों को गंभीर बनाता है।
इन सबके बावजूद अडानी समूह का कारोबार फिलहाल स्थिर बताया जा रहा है। हालांकि, एक स्पष्ट बदलाव यह देखा जा रहा है कि समूह अब विदेशी ऋण की तुलना में घरेलू वित्तीय संस्थानों पर अधिक निर्भरता दिखा रहा है। अडानी समूह का कहना है कि उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और वह कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखेगा।





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