कुत्ते की ऐसी स्वामीभक्ति की 1985 की फिल्म तेरी मेहरबानियां की आई सबको याद
लगभग 41 साल पहले जैकी श्रॉफ अभिनीत एक फिल्म आई थी जिसका नाम था तेरी मेहरबानियां । इस फिल्म में हीरो यानी जैकी श्रॉफ और उसकी वफादार कुत्ते मोती की कहानी दिखाई गई थी जो अमरीश पुरी के अत्याचारों के खिलाफ लड़ते हैं । और अंततः राम यानी जैकी श्रॉफ फिल्म में मर जाते हैं पर उनका कुत्ता मति अपने मालिक की मौत का बदला लेता है ।
यह इस फिल्म का जिक्र इसलिए किया जा रहा है कि पिछले हफ्ते हरियाणा और मध्य प्रदेश में कुत्तों की स्वामी भक्ति के दो ऐसी कहानी सामने आई , जिसने इस फिल्म की याद एक बार फिर लोगों के जेहन में ताजा कर दी । हरियाणा में जहां एक मलिक ने अपने कुत्ते के निधन पर हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से 13वीं का भोग करवा कर पूरे गांव को भोजन कराया तो वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में मालिक की मृत्यु हो जाने के बाद कुत्ते ने तब तक खाना नहीं खाया जब तक मलिक का अंतिम संस्कार नहीं हुआ । यही नहीं कुत्ता मालिक के पोस्टमार्टम हाउस तक शो को ले जा रहे हैं वहां के साथ-साथ दौड़ते हुए पहुंच गया।
पानीपत में इंसानियत की मिसाल: पालतू कुत्ते की 13वीं, हवन और भंडारे के साथ दी विदाई
हरियाणा के पानीपत से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पशु प्रेम और मानवीय संवेदनाओं को नई पहचान दी है। खटीक बस्ती में रहने वाले एडवोकेट बलबीर पंवार के परिवार ने अपने पालतू कुत्ते की मृत्यु के बाद ठीक उसी तरह धार्मिक रस्में निभाईं, जैसे किसी परिजन के लिए निभाई जाती हैं। परिवार ने कुत्ते की तेरहवीं पर हवन कराया और भंडारे का आयोजन कर समाज को भावुक कर देने वाला संदेश दिया।
परिवार के अनुसार रॉकी नाम का यह कुत्ता पिछले 13 वर्षों से उनके साथ था और उसे बेटे की तरह पाला गया था। रॉकी को परिवार का हिस्सा मानते हुए उसे ‘पंवार’ सरनेम भी दिया गया था। कुछ समय से वह किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। इलाज के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। रॉकी के निधन के बाद परिवार ने पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया और अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित कीं।
तेरहवीं के दिन घर का माहौल बेहद भावुक रहा। हवन के दौरान और भंडारे में परिवार के सदस्य आंसू नहीं रोक पाए। मौजूद लोगों ने इस आयोजन को पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की मिसाल बताया। एडवोकेट बलबीर पंवार ने कहा कि पालतू जानवर सिर्फ सुरक्षा या मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि परिवार के सदस्य बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि रॉकी भले ही अब साथ नहीं है, लेकिन उसकी यादें हमेशा उनके दिलों में जीवित रहेंगी।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में पालतू जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और पशु कल्याण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। पानीपत की यह कहानी समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि इंसान और जानवर के बीच रिश्ता सिर्फ जरूरत का नहीं, बल्कि भावनाओं और अपनापन का भी होता है।




Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!