“पहले बिठाओ पास, फिर दे दो बनवास” — कपिल सिब्बल का भाजपा की गठबंधन राजनीति पर तीखा हमला
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन रणनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा छोटे दलों का उपयोग सत्ता तक पहुंचने के लिए करती है और सत्ता में आने के बाद उन्हीं सहयोगियों को हाशिए पर धकेल देती है। महाराष्ट्र के निकाय चुनाव नतीजों के बाद दिए गए एक इंटरव्यू में सिब्बल ने भाजपा की राजनीति को “पहले पास, फिर बनवास” करार दिया।सिब्बल ने कहा कि जिन राज्यों में भाजपा को अपनी कमजोरी का अंदाजा होता है, वहां वह छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ समझौता कर लेती है। लेकिन जैसे ही सत्ता मिलती है, उन दलों की राजनीतिक हैसियत खत्म कर दी जाती है। उन्होंने दावा किया कि इस रणनीति का असर कई राज्यों में साफ दिखाई देता है।
सिब्बल ने कहा कि जिन राज्यों में भाजपा को अपनी कमजोरी का अंदाजा होता है, वहां वह छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ समझौता कर लेती है। लेकिन जैसे ही सत्ता मिलती है, उन दलों की राजनीतिक हैसियत खत्म कर दी जाती है। उन्होंने दावा किया कि इस रणनीति का असर कई राज्यों में साफ दिखाई देता है।महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए सिब्बल ने कहा कि 29 महानगरपालिकाओं के परिणामों से यह संकेत मिला है कि राजनीतिक नुकसान सभी दलों को हुआ, जबकि असली फायदा केवल भाजपा को मिला। उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार का उदाहरण देते हुए कहा कि पद भले ही मिला हो, लेकिन राजनीतिक भविष्य लगभग समाप्त हो गया है।
महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए सिब्बल ने कहा कि 29 महानगरपालिकाओं के परिणामों से यह संकेत मिला है कि राजनीतिक नुकसान सभी दलों को हुआ, जबकि असली फायदा केवल भाजपा को मिला। उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार का उदाहरण देते हुए कहा कि पद भले ही मिला हो, लेकिन राजनीतिक भविष्य लगभग समाप्त हो गया है।
सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि जहां भाजपा की कांग्रेस से सीधी टक्कर होती है, वहां वह खुला गठबंधन नहीं करती। इसके बजाय दबाव की राजनीति अपनाई जाती है, जिससे मजबूरी में अन्य दल समर्थन देने को बाध्य होते हैं। उन्होंने बिहार और हरियाणा के राजनीतिक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सहयोगी दल धीरे-धीरे कमजोर कर दिए गए।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बोलते हुए सिब्बल ने कहा कि वहां भाजपा को सहयोगी नहीं मिल पा रहे हैं, इसलिए पार्टी अब अलग-अलग रणनीतियों के जरिए जमीन तलाश रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत में धार्मिक राजनीति के सहारे सत्ता पाने की कोशिश की जा रही है।
कपिल सिब्बल ने विपक्षी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा के साथ समझौता सत्ता का रास्ता तो खोल सकता है, लेकिन यह रास्ता भविष्य को बंद भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि जनता अवसरवादी राजनीति को समझती है और ऐसे प्रयोग लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होते।





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